भारत के ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटरों का ऑपरेटिंग सिस्टम।
डिजीचालक आपका पूरा मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग सेंटर चलाता है — AI से स्कोर होने वाले ट्रैक टेस्ट, आधार से सत्यापित हाज़िरी, सिलेबस ट्रैकिंग और हर सरकारी फॉर्म — ताकि आपके ट्रेनी फॉर्म 5B पाएँ और RTO की ड्राइविंग टेस्ट लाइन से बच जाएँ।
- फॉर्म 5B ऑटोमैटिक
- आधार बायोमेट्रिक हाज़िरी
- छेड़छाड़-रोधी वीडियो सबूत
- हर वक़्त ऑडिट-रेडी
लाइसेंस की राह पर आप जो भी हों, रास्ता यहीं से जाता है।
डिजीचालक उन दो लोगों के लिए है जो भारत की सड़कों को सुरक्षित बनाते हैं: मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग सेंटर चलाने वाला उद्यमी, और सही तरीके से लाइसेंस चाहने वाला लर्नर।
ऐसा सेंटर चलाइए जो हर ऑडिट पास करे
मान्यता पाइए, कंप्लायंस में रहिए और एडमिशन बढ़ाइए। डिजीचालक मूल्यांकन, हाज़िरी, रिकॉर्ड और वह हर MoRTH फॉर्म ऑटोमैटिक कर देता है जो परिवहन प्राधिकरण कभी भी माँग सकता है।
- ऑटोमैटिक ट्रैक मूल्यांकन — मैनुअल स्कोरिंग के झगड़े ख़त्म
- फॉर्म 5B, 14 और 15 अपने-आप तैयार
- अचानक निरीक्षण के लिए ऑडिट पैक हमेशा तैयार
- हर गाड़ी और बैच का लाइव डैशबोर्ड
ढंग से सीखिए। RTO ड्राइविंग टेस्ट छोड़िए।
डिजीचालक से चलने वाले मान्यता प्राप्त सेंटर में ट्रेनिंग लीजिए, ऑटोमैटिक टेस्ट पास कीजिए, और फॉर्म 5B पाइए — वह सर्टिफिकेट जिससे RTO में ड्राइविंग टेस्ट माफ़ हो जाता है।
- 29 घंटे का स्ट्रक्चर्ड कोर्स, सिम्युलेटर सेशन समेत
- कैमरे से स्कोर होने वाला निष्पक्ष टेस्ट — कोई सिफ़ारिश नहीं
- QR से सत्यापित होने वाला फॉर्म 5B सर्टिफिकेट
- मोबाइल ऐप पर आपकी पूरी प्रगति
ADTC को जो-जो चाहिए, सब एक सिस्टम में
कैंडिडेट के रजिस्ट्रेशन से लेकर ऑडिटर के दरवाज़ा खटखटाने तक — नियमों की हर प्रक्रिया ऑटोमैटिक, लॉग्ड और दिखाने लायक तैयार।
AI ट्रैक मूल्यांकन
कैमरे, RTK-GNSS और RFID पाँचों अनिवार्य मैन्युवर — सर्पेंटाइन, 8-आकार, ग्रेडिएंट, रिवर्स-S और पैरेलल पार्किंग — सेंटीमीटर सटीकता से रियल-टाइम स्कोर करते हैं।
इन-कैबिन AI प्रॉक्टर
आधार से सत्यापित पहचान से लगातार फेस-मैच, साथ में सीटबेल्ट, फ़ोन-उपयोग और नक़ली कैंडिडेट की पहचान। जिसने ट्रेनिंग ली, उसी ने टेस्ट दिया — सबूत के साथ।
सरकारी फॉर्म ऑटोपायलट पर
पास होते ही फॉर्म 5B, फॉर्म 14 रजिस्टर, फॉर्म 15 डेली लॉग, 12A/13A फाइलिंग — बिना एक भी फोटोकॉपी के तैयार, साइन और सुरक्षित।
नियम 31J सिलेबस इंजन
हर थ्योरी घंटा, प्रैक्टिकल सेशन और सिम्युलेटर मॉड्यूल तय सिलेबस से मिलाकर ट्रैक होता है। घंटे सचमुच पूरे हों, तभी फॉर्म 5B खुलता है।
अदालत में टिकने वाला सबूत
हर टेस्ट का हैश-चेन वीडियो और टेलीमेट्री, पाँच साल तक सुरक्षित। QR से सत्यापित स्कोरशीट — 'मुझे जान-बूझकर फेल किया' वाला हर विवाद सेकंडों में ख़त्म।
इंडिया-स्टैक नेटिव
आधार बायोमेट्रिक हाज़िरी, सारथी/VAHAN लाइसेंस सत्यापन, डिजिलॉकर सर्टिफिकेट डिलीवरी, UPI फीस और WhatsApp अपडेट — पहले दिन से जुड़े हुए।
टेस्ट ट्रैक का हर मीटर, सेंसर की नज़र में
डिजीचालक ट्रैक सेंसर, कैमरे और गाड़ी की टेलीमेट्री को एक स्कोर में जोड़ता है। कैंडिडेट क्या चलाता है — और सिस्टम क्या देखता है, यह रहा।
- 1सर्पेंटाइनस्टीयरिंग की सफ़ाई, कर्ब से टक्कर नहीं
- 28-आकारदोनों लूप में सटीक रास्ता
- 3ग्रेडिएंट होल्डरोलबैक सेंटीमीटर तक मापा जाता है
- 4रिवर्स-Sमिरर का उपयोग और रिवर्स पाथ विचलन
- 5पैरेलल पार्किंगअल्ट्रासोनिक से बे-सीमा की निगरानी
- गंभीर गलतियाँ — सीमा पार, रोलबैक, रेड-लाइट उल्लंघन, पहचान बेमेल — टेस्ट अपने-आप रोक देती हैं, ठीक वैसे ही जैसे MoRTH दिशानिर्देश कहते हैं।
लर्नर लाइसेंस से ड्राइविंग लाइसेंस तक — बिना RTO टेस्ट
डिजीचालक से चलने वाले मान्यता प्राप्त सेंटर में ट्रेनिंग लीजिए — लाइसेंस का रास्ता छोटा, निष्पक्ष और पूरी तरह डिजिटल हो जाता है।
- 01
मान्यता प्राप्त सेंटर में दाख़िला लें
लर्नर लाइसेंस 30 दिन पुराना हो, फिर आधार के साथ डिजीचालक-संचालित ADTC में रजिस्टर करें। फीस UPI से; कोर्स शेड्यूल सीधे फ़ोन पर। - 02
तय सिलेबस पर ट्रेनिंग लें
कार लाइसेंस के लिए 29 घंटे — थ्योरी क्लास, सिम्युलेटर सेशन और असली ट्रैक प्रैक्टिस — बायोमेट्रिक हाज़िरी के साथ, ताकि हर घंटा सच में गिना जाए। - 03
ऑटोमैटिक टेस्ट दें
सेंसर लगे ट्रैक पर गाड़ी चलाइए। कैमरे और सेंसर निष्पक्ष स्कोर देते हैं — न परीक्षक का मूड, न सिफ़ारिश, सिर्फ़ आपकी ड्राइविंग। - 04
फॉर्म 5B पाइए, फिर लाइसेंस
पास होते ही फॉर्म 5B तुरंत डिजिलॉकर में। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन कीजिए — RTO का ड्राइविंग टेस्ट माफ़; RTO सिर्फ़ सत्यापित कर लाइसेंस जारी करता है।
ऐसा डैशबोर्ड, जो परिवहन प्राधिकरण हर सेंटर में देखना चाहे
मान्यता सबूतों पर टिकी होती है। डिजीचालक आपके सबूत परफ़ेक्ट रखता है — और बैच, गाड़ियों व इंस्ट्रक्टरों की रोज़ की माथापच्ची घटा देता है।
- सस्पेंशन-प्रूफ़: सिलेबस से भटकाव और हाज़िरी की कमी पहले ही रुक जाती है — ऑडिट में पकड़ी नहीं जाती
- सरप्राइज़-ऑडिट पैक: हर रजिस्टर, लॉग और सर्टिफिकेट एक क्लिक में एक्सपोर्ट
- ज़्यादा थ्रूपुट: ऑटोमैटिक टेस्ट यानी हर ट्रैक पर हर दिन ज़्यादा कैंडिडेट
- भरोसा जो बिकता है: माता-पिता वही सेंटर चुनते हैं जहाँ नतीजे ख़रीदे नहीं जा सकते
सबसे पहले पूछे जाने वाले सवाल
क्या सच में बिना RTO टेस्ट के ड्राइविंग लाइसेंस मिल सकता है?
डिजीचालक असल में है क्या?
क्या डिजीचालक सेंटर को मान्यता दिलाने में मदद करता है?
कौन-कौन सी गाड़ियाँ और लाइसेंस क्लास कवर होती हैं?
बेहतर ड्राइविंग की सड़क यहीं से शुरू होती है।
चाहे आप अगला शानदार ट्रेनिंग सेंटर बना रहे हों या अपनी पहली ड्राइविंग क्लास बुक कर रहे हों — डिजीचालक वही है, जैसा यह काम होना चाहिए।
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